विवाह के लिए धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को धर्म परिवर्तन अध्यादेश लागू किया। उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020 ( Uttar Pradesh Prohibition of Unlawful Conversion of Religion Ordinance, 2020) के मसौदे को उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को मंजूरी दी थी। शनिवार को प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अध्यादेश पर मुहर लगा दी। अध्यादेश के तहत गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन को गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध बना दिया गया है। प्रस्तावना के अनुसार, अध्यादेश का उद्देश्य, गलत बयानी, बल, अनुचित प्रभाव, जबर्दस्ती, प्रलोभन या कपटपूर्ण साधनों द्वारा या विवाह द्वारा एक धर्म से दूसरे धर्म में गैर कानूनी धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है। हालांकि, अध्यादेश को विवाह जैसे मसलों के संदर्भ में व्यक्तिगत स्वतंत्रता में अतिक्रममण माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा था कि अपनी पसंद के आदमी के साथ रहना, उनके धर्म की परवाह किए बगैर, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवन की स्वंतत्रता में निहित है। ऐसे में उत्तर प्रदे...
कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न और महिलाओं के मूल अधिकार – पर २०१३ के अधिनियम को समझने के पहले यह जानना जरूरी है कि कैसे लैंगिक उत्पीड़न सीधे- सीधे महिलाओं के मूल अधिकारों से जुड़ा है. एक उदाहरण लेते है. मान लीजिये एक ऑफिस में एक महिला कर्मचारी पर उसका बॉस या कोई सहकर्मी लगातार अभद्र टिपण्णियां करता है, या जबरदस्ती अपने ऑफिस में बेफिज़ूल बुलाता है, अब ऐसे में शायद वो महिला अपना पूरा मन लगाकर अपने बाकी सहकर्मियों की तरह प्रभावी रूप से कार्य न कर सके, अपनी प्रतिभा का पूरा प्रयोग न कर सके बल्कि वो शायद मानसिक (और कई मामलों में शारीरिक तौर पर भी) तौर पर उस गलत व्यवहार से उबरने की कोशिश में उलझी रहे. ऐसे प्रतिकूल माहौल का जॉब, प्रमोशन सब पर प्रभाव होगा। अत: कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न अनुच्छेद १९ में दी गयी व्यावसायिक स्वतंत्रता के अधिकार का और अनुच्छेद १४ में दिए गए बराबरी के अधिकार का हनन है. लैंगिक उत्पीड़न महिलाओं के गरिमा और सुरक्षा के साथ काम करने के हक़ का सीधा-सीधा उल्लंघन है. लैंगिक उत्पीड़न का प्रभाव सिर्फ पीड़ित पर नहीं बल्कि सभी महिला कर्मचारियों पर पड़ सकता है. महिलाओं के लिए ऐसे माहौ...
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