कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम 2013
कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न और महिलाओं के मूल अधिकार – पर २०१३ के अधिनियम को समझने के पहले यह जानना जरूरी है कि कैसे लैंगिक उत्पीड़न सीधे- सीधे महिलाओं के मूल अधिकारों से जुड़ा है. एक उदाहरण लेते है. मान लीजिये एक ऑफिस में एक महिला कर्मचारी पर उसका बॉस या कोई सहकर्मी लगातार अभद्र टिपण्णियां करता है, या जबरदस्ती अपने ऑफिस में बेफिज़ूल बुलाता है, अब ऐसे में शायद वो महिला अपना पूरा मन लगाकर अपने बाकी सहकर्मियों की तरह प्रभावी रूप से कार्य न कर सके, अपनी प्रतिभा का पूरा प्रयोग न कर सके बल्कि वो शायद मानसिक (और कई मामलों में शारीरिक तौर पर भी) तौर पर उस गलत व्यवहार से उबरने की कोशिश में उलझी रहे. ऐसे प्रतिकूल माहौल का जॉब, प्रमोशन सब पर प्रभाव होगा। अत: कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न अनुच्छेद १९ में दी गयी व्यावसायिक स्वतंत्रता के अधिकार का और अनुच्छेद १४ में दिए गए बराबरी के अधिकार का हनन है. लैंगिक उत्पीड़न महिलाओं के गरिमा और सुरक्षा के साथ काम करने के हक़ का सीधा-सीधा उल्लंघन है. लैंगिक उत्पीड़न का प्रभाव सिर्फ पीड़ित पर नहीं बल्कि सभी महिला कर्मचारियों पर पड़ सकता है. महिलाओं के लिए ऐसे माहौ...